मत्स्य पालन क्षेत्र के ढांचागत विकास और मछुआरों के सामाजिक उत्थान के लिए केंद्र सरकार द्वारा 10 सितंबर 2020 को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना लागू की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ की गई यह राष्ट्रीय परियोजना वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक की अवधि के दौरान सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में क्रियान्वित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य मछली पालन से लेकर बिक्री तक के पूरे तंत्र को आधुनिक बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और संबंधित समुदायों के जीवन स्तर को बेहतर करना है।
योजना के रणनीतिक रोडमैप के अनुसार, देश के कुल मछली उत्पादन को वित्त वर्ष 2019 के 13.75 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2025 तक 22 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचाने की समयबद्ध योजना बनाई गई है। इसी अवधि के भीतर वार्षिक निर्यात को ₹46,589 करोड़ (6.37 अरब डॉलर) से दोगुना करके ₹1,00,000 करोड़ (13.68 अरब डॉलर) करने, कृषि जीवीए में योगदान 7.28% से बढ़ाकर करीब 9% करने और घरेलू खपत को 5 किलोग्राम से बढ़ाकर 12 किलोग्राम प्रति व्यक्ति करने का लक्ष्य रखा गया है। कटाई के बाद होने वाली 20-25% की क्षति को घटाकर लगभग 10% करने के साथ ही 55 लाख नए रोजगार सृजित करने का संकल्प लिया गया है।
नीली क्रांति और सहायक नीतियों के चलते देश में मछली की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता वित्त वर्ष 2015 के 2.3 टन से सुधरकर वित्त वर्ष 2019 में 3.3 टन तक पहुंच चुकी है, जिसे आगे 5 टन प्रति हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य है। आय के संबंध में अलग से कोई सर्वेक्षण न होने के बावजूद उत्पादन और मांग में आई तेजी का सीधा लाभ हितधारकों की आमदनी पर दिखाई दिया है।
कुल 20,750 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना में जोखिम सुरक्षा और सामाजिक सहयोग को प्राथमिकता दी गई है। दुर्घटना बीमा व्यवस्था के अंतर्गत आकस्मिक मृत्यु या पूर्ण स्थायी अक्षमता की स्थिति में ₹5 लाख, आंशिक अक्षमता पर ₹2.50 लाख तथा चिकित्सीय उपचार के लिए ₹25,000 की वित्तीय सुरक्षा दी जाती है। इसके अलावा, मछली पकड़ने पर रोक की अवधि के दौरान निर्धन पारंपरिक मछुआरा परिवारों को पोषण एवं भरण-पोषण हेतु प्रति व्यक्ति ₹3,000 की सीधी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के लिए वर्ष 2018-19 से लागू केसीसी विस्तार योजना के जरिए अब तक 5,01,900 मत्स्य पालकों को कुल ₹3,692.73 करोड़ का ऋण आवंटित किया जा चुका है। बुनियादी ढांचे की मजबूती के लिए इसी वित्त वर्ष में ₹7,522.48 करोड़ का समर्पित कोष (FIDF) भी स्थापित किया गया था। वहीं, तटीय बस्तियों के समग्र उत्थान, आपदा प्रतिरोधक क्षमता और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य पालन विभाग ‘जलवायु-लचीले तटीय मछुआरा गांव’ कार्यक्रम को भी सक्रियता से आगे बढ़ा रहा है।