प्रधानमंत्री को मिले 1,500 उपहारों की ई-नीलामी 17 सितंबर से शुरू, दो युद्धपोतों के मॉडल भी शामिल

प्रधानमंत्री को मिले 1,500 उपहारों की ई-नीलामी 17 सितंबर से शुरू, दो युद्धपोतों के मॉडल भी शामिल

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्राप्त हुए लगभग 1,500 उपहारों की 8वीं ई-नीलामी 17 सितंबर से शुरू होने जा रही है। राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नीलामी प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक संचालित होगी। प्रधानमंत्री के 76वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे इस आयोजन में कुल 1,498 चुनिंदा स्मृति चिह्नों को बोली के लिए रखा गया है।

इस संग्रह में रक्षा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतीक भी शामिल हैं, जिनमें भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस नीलगिरि और मिसाइल विध्वंसक आईएनएस सूरत के मॉडल प्रमुख हैं। इन दोनों युद्धपोतों को पिछले साल 15 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में सशस्त्र सेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। मॉडल पर अंकित जानकारी के मुताबिक, सेवा में शामिल किए जाने के अवसर पर नौसेना प्रमुख ने इन्हें प्रधानमंत्री को सप्रेम भेंट किया था। राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय में देश भर से मिले इन सभी स्मृति चिह्नों की एक प्रदर्शनी भी आमजन के लिए लगाई जाएगी।

संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, इस 8वें संस्करण में 50 विशेष ‘हीरो ऑब्जेक्ट्स’ यानी प्रमुख वस्तुओं को रेखांकित किया गया है। इनमें सबसे उच्च आधार मूल्य कर्नाटक से प्राप्त भगवान राम के प्रतीक चिह्न का ₹13.50 लाख तय किया गया है। इसके अलावा काकतीय कला तोरणम की चांदी से बनी प्रतिकृति ₹9 लाख, ‘ट्री ऑफ लाइफ’ गोंड कला पेंटिंग ₹7.50 लाख, रथ पर विराजमान जगन्नाथ परिवार की कलाकृति ₹6 लाख तथा 99.99 शुद्धता वाली सोने की परत चढ़ी राधा-कृष्ण की प्रतिमा ₹5.40 लाख के आधार मूल्य पर सूचीबद्ध है।

मंत्रालय ने रेखांकित किया कि विभिन्न राज्यों से प्राप्त ये वस्तुएं भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस नीलामी से प्राप्त होने वाली समूची धनराशि को पूर्व की भांति ‘नमामि गंगे’ परियोजना में स्थानांतरित किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने पूर्व के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले सात चरणों में 7,400 से अधिक स्मृति चिह्नों की सफल नीलामी से 52 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। उन्होंने कहा कि 1,498 वस्तुओं का यह नवीनतम संकलन देश की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक परंपराओं और खेल जगत की सफलताओं का व्यापक दर्शन कराता है, जिसमें पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, असम, बिहार और ओडिशा सहित कई राज्यों का प्रतिनिधित्व है।

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