यूरोपीय परिषद के प्रमुख एंटोनियो कोस्टा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की आम चर्चा को संबोधित करते हुए वैश्विक विधि व्यवस्था और न्यायिक संस्थाओं के प्रति पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक नियमों के क्रियान्वयन में किसी भी तरह का दोहरा मापदंड बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, कोस्टा ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की मर्यादा बनाए रखना किसी देश की इच्छा पर निर्भर वैकल्पिक विषय नहीं, बल्कि एक अनिवार्य उत्तरदायित्व है। उन्होंने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) तथा इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) की स्वायत्तता का समर्थन करते हुए कहा कि इन संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्षता और बिना किसी बाधा के कार्य करने की स्वतंत्रता की रक्षा हर हाल में की जाएगी।
आईसीसी और उसके कर्मियों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि अदालती अधिकारियों को डराना या उन पर दबाव बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया राजनीतिक नफा-नुकसान या सुविधा के आधार पर तय नहीं की जा सकती।
अपने संबोधन के मुख्य बिंदुओं को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि विश्व के समक्ष मौजूद जटिल समस्याओं का हल केवल बहुपक्षीय साझेदारी के जरिए ही संभव है। उन्होंने शांति, सुरक्षा, पर्यावरण संकट, आर्थिक अस्थिरता तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी उभरती चुनौतियों को प्रमुख प्राथमिकताओं में गिनाया।
कोस्टा ने जानकारी दी कि बहुपक्षीय व्यवस्था को प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए यूरोपीय संघ ने इसी सप्ताह भारत, ब्राजील, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस और केन्या के साथ मिलकर ‘पी4एम’ (पार्टनर्स फ़ॉर मल्टीलेटरलिज़्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी) नामक पहल शुरू की है।
प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विवादों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यूक्रेन में रूसी सैन्य कार्रवाई को समाप्त करने और यूएन चार्टर के तहत यूक्रेन की क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान करते हुए स्थायी शांति की वकालत की। इसके साथ ही, उन्होंने गाजा व फिलिस्तीन के नागरिकों के संकट को दूर करने के लिए ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ को आगे बढ़ाने और ईरान से जुड़े तनाव को शांतिपूर्ण वार्ता से सुलझाने की आवश्यकता पर बल दिया।