गुवाहाटी/भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने असम प्रवास के दौरान गुवाहाटी के निकट स्थित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र सुआलकुची का दौरा किया। ‘सिल्क विलेज’ के रूप में विश्व विख्यात इस क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने रेशम उत्पादन की प्राचीन और पारंपरिक पद्धतियों का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री ने सुआलकुची की कार्यशालाओं में जाकर बुनकरों से सीधा संवाद किया। उन्होंने देखा कि किस प्रकार यहाँ के निवासी अपनी समृद्ध विरासत को जीवित रखते हुए हर घर में हाथकरघों (हैंडलूम) के माध्यम से अद्भुत कलाकृतियाँ तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बुनकरों के श्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पारंपरिक तकनीक न केवल एक कला है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार भी है।
भ्रमण के दौरान उन्होंने ‘बस्त्रा उद्यान’ और ‘आमार सुआलकुची’ संग्रहालय का अवलोकन किया, जहाँ उन्होंने असम के गौरव—मूगा (सुनहरा), पैट (सफेद) और एरी (बेज) रेशम की निर्माण प्रक्रिया को समझा। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अन्य राज्यों की श्रेष्ठ कलाओं को समझकर मध्यप्रदेश के शिल्प क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।