मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के कैलारस थाना क्षेत्र में 16 जून को एक बड़ा हादसा टल गया। यहां के डोंगरपुर नरवुआ इलाके के पास एक 45 वर्षीय व्यक्ति अचानक कुएं में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही आपातकालीन सेवा डायल-112 के जवानों ने तत्परता और मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए स्थानीय नागरिकों की मदद से पीड़ित को सुरक्षित बाहर निकाला। समय रहते की गई इस त्वरित कार्रवाई के चलते घायल व्यक्ति को अविलंब शासकीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसे आवश्यक चिकित्सकीय उपचार मिल सका।
इस रेस्क्यू ऑपरेशन की शुरुआत मंगलवार, 16 जून को हुई, जब भोपाल स्थित राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 को एक आपातकालीन कॉल प्राप्त हुई। सूचना में बताया गया कि डोंगरपुर नरवुआ के समीप एक व्यक्ति कुएं में गिर गया है और उसकी जान खतरे में है, जिसके लिए तुरंत पुलिस सहायता की दरकार है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कंट्रोल रूम ने बिना वक्त गंवाए कैलारस थाना क्षेत्र में गश्त कर रहे डायल-112 के फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल (एफआरवी) को तुरंत घटना स्थल की ओर रवाना कर दिया।
कंट्रोल रूम से मिले निर्देश के बाद डायल-112 के स्टाफ में शामिल आरक्षक विजयपाल गुर्जर और पायलट संतोषी बेहद कम समय में मौके पर पहुंच गए। घटना स्थल पर पहुंचने के बाद उन्होंने देखा कि कुएं की गहराई में गिरा 45 वर्षीय व्यक्ति चोटिल होने के कारण गंभीर स्थिति में था और दर्द से कराह रहा था। पीड़ित की नाजुक हालत को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया।
जवानों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए वहां मौजूद स्थानीय ग्रामीणों को अपने साथ जोड़ा और राहत कार्य शुरू किया। सामूहिक प्रयासों से घायल व्यक्ति को बेहद सावधानीपूर्वक कुएं से बाहर निकाला गया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे अपनी एफआरवी गाड़ी में लिटाया और तत्काल कैलारस के शासकीय चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसे भर्ती कर इलाज शुरू किया गया।
डायल-112 के स्टाफ द्वारा की गई इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई की बदौलत ही पीड़ित को ऐन वक्त पर डॉक्टरी सहायता मिल सकी। यह पूरी घटना ‘डायल-112 हीरोज’ श्रृंखला की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जो यह साबित करती है कि यह आपातकालीन सेवा महज सूचनाओं पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है। बल्कि, संकट के हर दौर में मानवीय सरोकारों को सर्वोपरि रखते हुए आम नागरिकों की सुरक्षा और उनके जीवन की रक्षा के लिए चौबीसों घंटे पूरी मुस्तैदी के साथ समर्पित है।