भारत में पदस्थ आसियान देशों के राजनयिकों ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित ब्रह्मोस मुख्यालय पहुंचकर भारतीय रक्षा तकनीक और इंजीनियरिंग प्रणाली का जायजा लिया। इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग सहित अन्य सदस्य देशों के राजनयिक शामिल रहे।
दौरे की जानकारी साझा करते हुए सिंगापुर के उच्चायुक्त ने सोशल मीडिया पर इस यात्रा को अत्यंत व्यावहारिक और आँखें खोलने वाला अनुभव करार दिया। उन्होंने कहा कि आसियान देशों के सहयोगियों के लिए यह यात्रा भारतीय रक्षा क्षेत्र की प्रगति और ब्रह्मोस के इंजीनियरिंग पक्ष को गहराई से जानने का बेहतरीन जरिया बनी। उन्होंने फिलीपींस के दूतावास द्वारा इस दौरे के सफल समन्वय और ब्रह्मोस प्रबंधन के आतिथ्य सत्कार की भी सराहना की।
उल्लेखनीय है कि आसियान क्षेत्र के कई देश भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली में गहरी रुचि दिखा चुके हैं। फिलीपींस ने वर्ष 2022 में ऐतिहासिक समझौते के साथ इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के पहले विदेशी ग्राहक के रूप में शुरुआत की थी। तय समयसीमा के अनुसार, फिलीपींस को मिसाइल प्रणाली की पहली खेप 2024 में और दूसरी आपूर्ति अप्रैल 2025 में पूरी की गई थी।
विस्तार लेते रक्षा संबंधों के बीच, भारत ने वियतनाम को भी ब्रह्मोस मिसाइल व तटीय रक्षा तंत्र प्रदान करने हेतु मई 2026 के शांगरी-ला डायलॉग में औपचारिक करार किया, जिसे रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने सत्यापित किया था। इसके उपरांत, जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस तथा भारत निर्मित ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल निर्यात के लिए ऐतिहासिक समझौता किया गया।
भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओएम के संयुक्त प्रयास से निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की प्रमुख क्रूज प्रणालियों में गिनी जाती है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के मुताबिक, यह हथियार प्रणाली जमीनी लक्ष्यों को भेदने के साथ-साथ समुद्री पोतों पर सटीक प्रहार करने वाले दोनों विशिष्ट प्रारूपों में संचालित होती है।