पाकिस्तान के PM बोले- चीन में उईगर मुस्लिमों पर कोई जुल्म नहीं होता

पाकिस्तान के PM बोले- चीन में उईगर मुस्लिमों पर कोई जुल्म नहीं होता

सियासी मुश्किलों में फंसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर अमेरिका और पश्चिमी देशों को नाराज करने वाला बयान दिया है। इमरान के मुताबिक- चीन के शिनजियांग प्रांत में उईगर मुस्लिमों के साथ कोई भेदभाव या जुल्म नहीं होता और इस मामले में पश्चिमी देशों के आरोप गलत हैं। अफगानिस्तान के मसले पर खान का कहना है कि अमेरिका ने वहां शुरुआत से आखिर तक सिर्फ गलतियां कीं। इमरान कहते हैं कि अफगानिस्तान में तालिबान के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

इमरान खान ने अमेरिकी टीवी चैनल CNN को एक इंटरव्यू दिया है। इसमें उन्होंने कई मुद्दों पर बात की है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनके उईगर मुस्लिमों और अफगानिस्तान तालिबान पर दिए बयानों की हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इमरान ने एक बार फिर अमेरिका और पश्चिमी देशों को भड़काने वाला बयान दिया है। ऊईगर मुस्लिमों के सवाल पर इमरान ने कहा- कश्मीर पर दुनिया कुछ नहीं बोलती। शिनजियांग में उईगर मुस्लिमों की बात सब करते हैं। हमारे पास चीन में बस एक सोर्स है और वो हैं वहां हमारे एम्बेसेडर।

जर्नलिस्ट फरीद जखारिया ने पूछा- क्या आप शिनजियांग में जो कुछ हो रहा है, उसकी निंदा भी नहीं करेंगे? इस पर इमरान ने कहा- मुझे नहीं लगता कि वहां कुछ गलत हो रहा है। दुनिया कोल्ड वॉर की तरफ बढ़ रही है। दो पक्ष हैं। हम किस पर भरोसा करें। ऊईगर मुस्लिमों पर अमेरिका जो कहता है, चीन का जवाब उससे बिल्कुल अलग है।

इमरान ने अमेरिका की आतंकवाद के खिलाफ जंग को सिरे से खारिज कर दिया। कहा- अमेरिका ने जो किया, या वो जो कर रहा है-उससे तो आतंकवादियों की एक नई नस्ल पैदा होगी। इस जंग में हमने अपने 80 हजार लोगों को गंवाया, लेकिन इसके बावजूद आतंकी बढ़ रहे हैं। अमेरिका को पॉलिसी रिव्यू करना होगा। अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन अपने नागरिकों को बताती है कि ड्रोन सिर्फ आतंकियों को मार गिराते हैं, लेकिन हमारे यहां तो गांवों में आम आदमी मारे गए। आधी रात को सोते हुए लोगों पर यह हमले किए जाते हैं।

अफगानिस्तान के बारे में पूछे गए एक सवाल पर इमरान ने कहा- अमेरिका तालिबान हुकूमत को पसंद करे या नापसंद। सच्चाई ये है कि अमेरिका अफगानिस्तान में नाकाम रहा है और अब अफगानिस्तान में तालिबान के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। वहां चार करोड़ लोगों की जिंदगी खतरे में है। वहां के हालात का असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ता है। अगर वहां अमन होगा तो पाकिस्तान में भी शांति आएगी। अमेरिका को आज नहीं तो कल तालिबान को मान्यता देना ही होगी। अफगानिस्तान के अकाउंट फ्रीज कर देने से आम अफगान नागरिकों को ही दिक्कत होगी।

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