तालिबान की अमेरिका को धमकी:

तालिबान की अमेरिका को धमकी:

6 महीने से अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान ने पहली बार अमेरिका को सीधी धमकी दी है। तालिबान ने कहा- अमेरिकी सरकार उसके वॉशिंगटन में फ्रीज किए गए अकाउंट्स और एसेट्स को जल्द से जल्द रिलीज करे, अगर ऐसा नहीं होता तो हम अमेरिका पर अपनी पॉलिसी बदलने पर विचार करेंगे।

तालिबान का यह बयान अहम है। दरअसल, पिछले ही हफ्ते बाइडेन एमिनिस्ट्रेशन ने फैसला किया था कि वो 7 अरब डॉलर के फ्रीज एसेट्स में से आधा यानी 3.5 अरब डॉलर 9/11 के विक्टिम्स के फैमिली मेंबर्स को देगी। बचा हुआ आधा हिस्सा किसी ट्रस्ट के जरिए अफगानिस्तान की जनता पर खर्च किया जाएगा। यह पैसा अफगानिस्तान की तालिबान हुकुमत के खातों में नहीं जाएगा।बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन के फैसले से तालिबान बेहद नाराज है। उसके प्रवक्ता इनामउल्लाह समागनी ने एक लिखित बयान जारी किया। इसमें कहा गया है- अमेरिकी फैसला एक तरह की चोरी और सिद्धांतों के खिलाफ है। 9/11 के हमलों का अफगानिस्तान से कोई लेना-देना नहीं था। अमेरिका ने हमारी सरकार से जो समझौता किया था, यह उसके भी खिलाफ है। अगर अमेरिका अपना फैसला नहीं बदलता और इस तरह के भड़काऊ कदम उठाता रहता है तो हमें भी अपनी अमेरिकी नीति में बदलाव करना पड़ेगा। बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन को अफगान लोगों से रिश्ते खराब नहीं करना चाहिए। हमारे फंड्स बिना किसी कांटछांट और शर्त के रिलीज किए जाने चाहिए।

शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर सिग्नेचर किए थे। इसके तहत 7 अरब डॉलर (52 हजार 733 करोड़ रुपए) में से 3.5 अरब डॉलर अफगान नागरिकों पर खर्च किए जाएंगे, जबकि बाकी आधा हिस्सा उन अमेरिकी नागरिकों को मिलेगा जिनके अपने 9/11 हमले में मारे गए थे।

बाइडेन के सामने तीन विकल्प थे। पहला- फंड्स को बेमियादी तौर पर फ्रीज कर दिया जाए। दूसरा- पूरे फंड्स तालिबान हुकूमत को दे दिए जाएं और तीसरा- इन्हें 9/11 विक्टिम्स की फैमिलीज को मुआवजे के तौर पर दे दिया जाए। फिलहाल, 7 अरब डॉलर के यह फंड्स न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व में मौजूद हैं। अमेरिकी अदालत बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन की अपील पर तीन बार सुनवाई और फैसला टाल चुकी है। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। एक सच ये भी है कि कोर्ट इस पर आखिरी फैसला सुनाएगा।व्हाइट हाउस के मुताबिक, अफगानिस्तान के लोगों की मदद के लिए फंड्स इस तरह मुहैया कराए जाएंगे कि इसका कोई भी हिस्सा तालिबान हुकूमत के हाथ न लगे। अमेरिका के ऊपर दबाव था कि वो अफगानिस्तान के चार करोड़ लोगों की मुसीबतों के मद्देनजर फंड्स रिलीज करे। अमेरिका ने ये साफ कर दिया है कि तालिबान को अपने तमाम वादे पूरा करने होंगे। खासतौर पर महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा से जुड़े।

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