पीएम ने किया IN-SPACE हेडक्वॉर्टर का उद्घाटन:

पीएम ने किया IN-SPACE हेडक्वॉर्टर का उद्घाटन:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात की यात्रा पर हैं। यहां उन्होंने नवसारी जिले में 3,050 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें क्षेत्र में जल आपूर्ति में सुधार लाने और जीवनयापन आसान बनाने पर केंद्रित परियोजनाएं शामिल हैं। इसके बाद उन्होंने अहमदाबाद में इसरो के नए भवन का उद्घाटन किया। इस मौके पर उनके साथ गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आज 21वीं सदी के आधुनिक भारत की विकास यात्रा में एक शानदार अध्याय जुड़ा है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र के मुख्यालय के लिए सभी देशवासियों को और वैज्ञानिक समुदाय को बहुत-बहुत बधाई।

उन्होंने कहा कि IN-SPACe भारत के युवाओं को अपना टैलेंट दिखाने का मौका देगा। चाहे वो सरकार में काम कर रहे हों या प्राइवेट सेक्टर में। IN-SPACe सभी के लिए बेहतरीन अवसर बनाएगा। इसमें भारत की स्पेस इंडस्ट्री में क्रांति लाने की क्षमता है।

इससे पहले PM ने खुडवेल में आदिवासियों की विशाल सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘गुजरात गौरव अभियान का हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व का पल है। यह भी मेरे लिए गर्व की बात है कि आज मेरी सभी में 5 लाख लोग एकत्रित हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या में तो लोग मेरे मुख्यमंत्री के कार्यकाल में भी नहीं आते थे। यह सब कुछ गुजरा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल के प्रयासों से ही संभव हो पाया है। बहुत समय से मेरा यहां आने का मन था, क्योंकि मैं आदिवासी भाई-बहनों के विकास की ढेरों किस्से सुन रहा था।’चुनाव का मतलब काम नहीं, चुनौती है। मैं विरोधियों से कहना चाहता हूं कि कोई एक ऐसा हफ्ता खोजकर बता दो, जब यहां कोई विकास कार्य न हुआ हो। हम चुनाव जीतने नहीं आए हैं, लोगों का भला करने आए हैं। हम लोगों के आशीर्वाद से चुनाव जीतते हैं। पूर्व में आपके आदिवासी क्षेत्र में जो मुख्यमंत्री हुआ करते थे, तब यहां पानी की एक टंकी तक नहीं हुआ करती थी। उन्होंने हैंडपंप लगवाते तो वे भी दो-तीन महीनों में खराब हो जाते थे। एक बार की बात है गुजरात के एक पूर्व मुख्यमंत्री ने जामनगर में एक पानी की टंकी का उद्घाटन किया तो गुजरात के अखबारों के पहले पन्ने पर बड़ी खबर छपी थी। गुजरात ने वो दिन भी देखे हैं।मैं जब भी यहां आता था तो खाली हाथ ही आया करता था। आपका प्यार और आशीर्वाद से मुझे यहां से कभी भूखा नहीं जाना पड़ता था। आप लोगों ने ही मुझे आदिवासी क्षेत्रों के लिए काम करने का मौका दिया है। मुझे आपसे ही समाज के लिए बहुत कुछ सीखने को मिला है। क्योंकि, आप ही हैं, जो पर्यावरण की रक्षा करते हुए समाज की सबसे बड़ी सेवा करते हैं। डांग जिले को प्राकृतिक खेती में उनके अद्भुत कार्य के लिए मैं बधाई देना चाहता हूं। मेरे जमाने में शुरू हुए साइंस स्ट्रीम के स्कूल ही हैं कि अब आदिवासी बेटों को डॉक्टर बनने के लिए अंग्रेजी सीखने की जरूरत नहीं पड़ती। अब हम उसे मातृभाषा में ही डॉक्टर बनाने लगे हैं।

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