महंगाई भत्ता व गृह भाड़ा भत्ता की मांग को लेकर सरकारी कर्मचारियों ने 5 दिन हड़ताल की। कलमबंद आंदोलन शुरू होने के पहले और बाद में शनिवार, रविवार पड़ने से 9 दिन तक दफ्तरों में काम ठप रहा। सोमवार को सभी कर्मचारी काम पर लौट आए हैं, लेकिन 20 दिन बाद 22 अगस्त से अनिश्चितकाल के लिए आंदोलन करेंगे। इसकी मुख्य वजह सरकार द्वारा हड़ताल के 5 दिनों का वेतन कटौती की आदेश जारी करना है।
यह आदेश 29 जुलाई को प्रदर्शन समाप्त होने के कुछ घंटे बाद उप सचिव मेरी खेस्स ने जारी किया। इस आदेश से कर्मचारी संगठन बौखला गए हैं। इसलिए एक बार फिर हड़ताल करने का ऐलान कर दिया है। अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के संयोजक मुकेश पांडेय ने दावा कि 22 से हड़ताल पर जाने की सूचना मुख्य सचिव अमिताभ जैन को प्रदेश पदाधिकारियों ने दे दी है। सरकारी कर्मचारियों को 7वें वेतनमान के तहत ना महंगाई भत्ता मिल रहा है और ना ही भाड़ा भत्ता। हर महीने 4 से 14000 का नुकसान होने का दावा है।
इधर 9 दिन बाद सरकारी दफ्तरों का ताला खुलने से लोग जरूरी काम कराने कलेक्टोरेट, तहसील कार्यालय, नगर निगम, नपं सहित प्रमुख कार्यालय पहुंचते रहे। सबसे ज्यादा भीड़ कलेक्टोरेट में रही।अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के जिला संयोजक मुकेश पांडेय ने कहा कि सरकार हमारी स्वतंत्रता का अधिकार छीन रही है। 25 से 29 जुलाई तक 5 दिन सूचना देकर हड़ताल पर थे, लेकिन सरकार ने वेतन कटौती का आदेश जारी कर कर्मचारियों के जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त तक सरकार हमारी मांगों को पूरा नहीं करती तो 22 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। सोमवार को सरकार के आदेश की प्रति कलेक्टोरेट में जलाई।