CM ने ‘कृष्ण कुंज’ में रोपा ‘कदंब’:रायपुर से धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व के बाग का शुभारंभ

CM ने ‘कृष्ण कुंज’ में रोपा ‘कदंब’:रायपुर से धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व के बाग का शुभारंभ

छत्तीसगढ़ में शुक्रवार यानी आज से शहरी गार्डन ‘कृष्ण कुंज’ की शुरुआत हो गई है। रायपुर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस बाग का लोकार्पण किया। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना करने के बाद ‘कृष्ण कुंज’ में कदंब का पौधा रोपा। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि पौध रोपण को जन-जन से जोड़ने, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए इसे ‘कृष्ण-कुंज’ नाम दिया गया है। प्रदेश भर में ऐसे 162 कुंज विकसित किए जाएंगे। यहां सांस्कृतिक-धार्मिक महत्व के पेड़-पौधों को लगाया जाना है।रायपुर के तेलीबांधा में 1.68 हेक्टेयर में बनाए गए ‘कृष्ण कुंज’ में 383 पौधे रोपे गए हैं। इनमें बरगद, पीपल, कदंब जैसे सांस्कृतिक महत्व के पौधे शामिल हैं। इसके अलावा जीवनोपयोगी आम, इमली, बेर, गंगा इमली, जामुन, गंगा बेर, शहतूत, तेंदू ,चिरौंजी, अनार, कैथा, नीम, गुलर, पलास, अमरूद, सीताफल, बेल, आंवला के पौधे लगाए जाएंगे। कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री ने इस योजना की घोषणा की थी। उस समय इसकी शुरुआत के लिए जन्माष्टमी की तिथि तय हुई थी।

मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को ’कृष्ण-कुंज’ विकसित करने के लिए वन विभाग को न्यूनतम एक एकड़ भूमि का आबंटन करने के निर्देश दिए थे। अब तक राज्य के 162 स्थलों को ’कृष्ण कुंज’ के लिए चिह्नांकित कर लिया गया है। कृष्ण कुंज को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए सभी निकायों में एकरूपता प्रदर्शित करने हेतु वन विभाग द्वारा बाउंड्रीवाल गेट पर लोगो का डिजाइन एक समान तैयार किया गया है।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ‘कृष्ण-कुंज’ योजना के उद्देश्यों को लेकर कहा है, ‘पौध रोपण को जन-जन से जोड़ने, अपने सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उन्हें विशिष्ट पहचान देने के लिए इसका नाम ‘कृष्ण-कुंज’ रखा गया है। विगत वर्षों में शहरीकरण की वजह से हो रही अंधाधुंध पेड़ों की कटाई से इन पेड़ों का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है। आने वाली पीढ़ियों को इन पेड़ों के महत्व से जोड़ने के लिए पहल की जा रही है।

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