यूक्रेन से लौटे मेडिकल स्टूडेंट्स को भारत के कॉलेज में एडमिशन देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को होने वाली सुनवाई शुक्रवार के लिए टल गई है। इस मामले में केंद्र सरकार मे सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर बताया है कि इन मेडिकल स्टू़डेंट्स को भारत के कॉलेजों में दाखिला देना कानूनन संभव नहीं है।
सरकार ने कहा है कि ये वो छात्र हैं जो या तो NEET में कम अंक के चलते वहां गए थे या सस्ती पढ़ाई के लिए गए थे। केंद्र ने बताया कि ये स्टूडेंट्स यूक्रेन के कॉलेज से अप्रूवल लेकर दूसरे देशों में डिग्री पूरी करने का विकल्प चुन सकते हैं।
केंद्र ने एफिडेविट में कहा है कि अगर इन स्टूडेंट्स को खराब मेरिट के बावजूद देश के सबसे प्रीमियर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिया गया तो यह उन स्टूडेंट्स के साथ अन्याय होगा जो कम NEET स्कोर की वजह से इन कॉलेजों में एडमिशन नहीं पा सके थे और उन्हें दूसरे कॉलेजों में दाखिला लेना पड़ा।
दूसरी ओर यह भी कहा गया कि अगर इन स्टूडेंट्स को देश के प्राइवेट कॉलेजों में दाखिला देते हैं तो ये प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस भरने में सक्षम नहीं भी हो सकते हैं।