छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की सरकारी खरीदी एक नवंबर से शुरू हो रही है। सरकार दो हजार 497 केंद्रों पर धान खरीदने को तैयार है। अगले तीन महीने छत्तीसगढ़ के किसानों को नकदी दिलाने के हैं। खेतों में धान की फसल पककर तैयार है। लेकिन कई इलाकों में अक्टूबर मध्य तक हुई बरसात की वजह से जल जमाव की स्थिति है। इसने किसानों के सामने कुछ दिक्कतें खड़ी की है। इसके बावजूद प्रदेश के अधिकतर जिलों में कटाई जोर-शोर से शुरू हो चुकी है।
राजधानी रायपुर से लगे दुर्ग जिले के गांवों में धान की फसल तैयार है, लेकिन कटाई में तेजी नहीं दिख रही है। पाटन के पास मोतीपुर में धान के खेतों में अभी भी पानी भरा है। एक ग्रामीण किशोर साहू ने बताया, खेतों में हार्वेस्टर ले जाने पर धंसने का खतरा है। इसकी वजह से अभी कटाई नहीं हो पा रही है। जैसे-जैसे जमीन सूखेगी कटाई में भी तेजी आएगी। गरियाबंद के फिंगेश्वर क्षेत्र के अपेक्षाकृत ऊंचे खेतों में धान की फसल पूरी तरह पक चुकी है। जिन खेतों में हार्वेस्टर ले जाने लायक स्थितियां हैं वहां मशीन से और नम खेतों में किसान मजदूरों के जरिये कटाई शुरू करवा चुके हैं।