कांग्रेस संगठन की सर्वोच्च बैठक अर्थात महाधिवेशन रायपुर में चल रहा है। 1885 में स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का यह 85वां राष्ट्रीय अधिवेशन है। ऐसे अधिवेशन होते रहे हैं, लेकिन इस बार यह अधिवेशन अपने पहले दिन, पहले ही सत्र में विशेष चर्चा का केंद्र बन गया है। इसके दो कारण है पहला स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में गांधी परिवार से किसी के नहीं शामिल होना और दूसरा कांग्रेस वर्किंग कमेटी के चुनाव नहीं कराने का निर्णय लिया जाना।
अधिवेशन की शुरुआत हुई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक से। स्टीयरिंग कमेटी ही अधिवेशन के विषयों, संचालन के बिंदु तय करती है। पहले से रखे गए मुद्दों पर बड़े फैसले लेती है। इस अहम बैठक में गांधी परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ। ऐसा पिछले 25 साल में नहीं हुआ। पार्टी के दोनों पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और सबसे ताकतवर नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी रायपुर पहुंचे, लेकिन दोपहर 3 बजे। जबकि यह बैठक दोपहर करीब 1.30 खत्म हो गई थी।
नेताओं ने कहा कि गांधी परिवार यह साबित करना चाहता है कि कांग्रेस अब सिर्फ एक परिवार के दायरे से बाहर निकले। जैसे इस बार पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष गैर गांधी यानि मल्लिकार्जुन खड़गे को बनाया गया है, वैसे ही यह भी साबित करना है कि पार्टी चलाने में उनको फ्री हैंड दिया जा रहा है। इसके साथ ही ऐसा कर यह भी जाहिर करना है कि कांग्रेस में पूरी तरह लोकतंत्र है। यहां सभी मिलकर फैसला करते हैं। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा, कांग्रेस को परिवारवाद के मुद्दे पर लगातार घेरती आई है। इसलिए इस हमले को नाकाम करने के लिए गांधी परिवार संगठन के मुद्दे पर सभी सदस्यों, नेताओं की राय को अहमियत दे रहा है।

