भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इसे 5.5% पर बरकरार रखा गया है। इसका सीधा मतलब है कि बैंकों से लिए गए लोन और आपकी मासिक EMI (किस्त) पर कोई असर नहीं पड़ेगा, यानी ये न तो महंगे होंगे और न ही सस्ते।
इससे पहले अगस्त में हुई मीटिंग में भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ था।
अन्य मुख्य घोषणाएँ:
- GDP ग्रोथ अनुमान में बढ़ोतरी: RBI ने देश के GDP ग्रोथ अनुमान को 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है।
- निर्णय का कारण: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज, 1 अक्टूबर को बताया कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सभी सदस्य ब्याज दरों को स्थिर रखने के पक्ष में थे। यह फैसला GST में कटौती के बाद महंगाई में आई कमी को ध्यान में रखते हुए लिया गया।
- बैठक: यह निर्णय मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चली बैठक में लिया गया।
(रेपो रेट क्या है?): रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों को लोन देता है। इसमें बदलाव न होने का मतलब है कि बैंकों के लिए फंड की लागत स्थिर रहेगी।