सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हेट स्पीच (नफरत भरे भाषणों) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राजनेताओं और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को कड़ा संदेश दिया है। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि देश में भाईचारा कायम रखना नेताओं का प्राथमिक कर्तव्य है।
अदालत की मुख्य बातें:
- सोच में बदलाव जरूरी: कोर्ट ने कहा कि नफरत भरे भाषणों को रोकने के लिए सबसे पहले अपनी सोच को सुधारना होगा, क्योंकि शब्द विचार के बाद ही आते हैं।
- संवैधानिक नैतिकता: सीजेआई ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे वैचारिक मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे का सम्मान करें और संवैधानिक मूल्यों का पालन करें।
- दिशानिर्देशों की सीमा: जस्टिस बागची और जस्टिस नागरत्ना ने पुराने निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि अदालत कितने भी नियम बना ले, लेकिन उन्हें लागू करने और भाईचारा बढ़ाने की असली जिम्मेदारी खुद राजनीतिक दलों की ही है।