भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ के संकल्प को दोहराते हुए कहा है कि प्रदेश की मिट्टी को सोना बनाने के लिए हर खेत तक पानी पहुँचाना उनकी प्राथमिकता है। राज्य के बजट 2026-27 में जल प्रदाय और सिंचाई परियोजनाओं के लिए व्यापक बजटीय प्रावधान किए गए हैं, जिनका उद्देश्य मध्यप्रदेश के सिंचित रकबे को 100 लाख हेक्टेयर के ऐतिहासिक लक्ष्य तक ले जाना है।
नर्मदा घाटी विकास (NVDA) के प्रमुख आवंटन: सरकार ने नर्मदा घाटी के अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई और बिजली प्रबंधन के लिए बड़ी राशि आवंटित की है:
- बिजली बिल भुगतान: एन.वी.डी.ए. की योजनाओं के बिजली बिलों के लिए 689 करोड़ रुपये।
- प्रमुख उद्वहन (Lift) योजनाएं: सेंधवा (500 करोड़), सांवेर (400 करोड़), कालीसिंध फेस-2 (400 करोड़), खंडवा (300 करोड़), शहीद इलाप सिंह (300 करोड़) और धार उद्वहन परियोजना (150 करोड़)।
- नहर एवं बैराज: बरगी नहर व्यपवर्तन (399 करोड़) और चिंकी बोरास बैराज (350 करोड़)।
- विशेष निवेश: नर्मदा नदी के घाट निर्माण (80 करोड़) और सिंचाई योजनाओं के सौर उर्जीकरण (Solarization) के लिए 100 करोड़ रुपये।
जल संसाधन विभाग का बजट: विभाग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 3062 करोड़ रुपये बांधों के निर्माण हेतु और केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के लिए 1000 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है। साथ ही, कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट के लिए 290 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।