मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रानी अवंतीबाई के बलिदान दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश वीरांगनाओं की पावन धरा है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती, रानी कमलापति और रानी अवंतीबाई जैसी लोकनायिकाओं ने विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध जो साहस दिखाया, वह इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को डिंडोरी में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
विरासत से विकास का संकल्प रानी अवंतीबाई की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने डिंडोरी में 1 करोड़ रुपये की लागत से बने नवनिर्मित संग्रहालय का लोकार्पण किया। इस संग्रहालय में रानी की फोटो गैलरी और उनके शस्त्र प्रदर्शित किए गए हैं, जो भावी पीढ़ियों को उनके शौर्य की याद दिलाएंगे। डॉ. यादव ने बताया कि 1857 की क्रांति में रेवांचल क्षेत्र में रानी की भूमिका वैसी ही थी, जैसी झांसी में रानी लक्ष्मीबाई की थी। सरकार ने उनकी शहादत को सम्मान देने के लिए सागर में उनके नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना भी की है।
डिंडोरी की उपलब्धियों की सराहना मुख्यमंत्री ने डिंडोरी जिला प्रशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिला उनके हृदय के अत्यंत करीब है। उन्होंने एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत एक ही दिन में 50 हजार से अधिक महिलाओं की स्वास्थ्य जांच कर ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में नाम दर्ज कराने पर बधाई दी। साथ ही, बेटियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क तैयारी कराने वाले ‘पंखिनी अभियान’ और एचपीवी टीकाकरण में जिले के प्रथम आने को महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।