विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को सूरीनाम दौरे के दौरान भारत और सूरीनाम के बीच बढ़ती साझेदारी को रेखांकित किया। एक आधिकारिक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग और मित्रता के इस नए पड़ाव को ऐतिहासिक बताया। विदेश मंत्री ने इस अवसर पर एक सूक्ष्म और लघु उद्यम विकास परियोजना के तहत फल प्रसंस्करण इकाई (फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट) का हस्तांतरण किया, जो विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है।
डॉ. जयशंकर ने भारत की कृषि उन्नति का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने नीतियों, संसाधनों और आधुनिक तकनीक के समन्वय से कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विकास केवल खाद्य सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘सबका साथ-साथ विकास’ के संकल्प को भी दर्शाता है। मंत्री के अनुसार, सूरीनाम में स्थापित यह नई परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ग्लोबल साउथ’ के विजन और भारत-कोफकोर (CARICOM) मंत्रीस्तरीय चर्चाओं का परिणाम है।
सूरीनाम सरकार द्वारा पैशन फ्रूट की खेती को प्रोत्साहन देने के प्रयासों की सराहना करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह मशीनरी भविष्य में अन्य फलों के प्रसंस्करण के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सूरीनाम ने अपनी प्राथमिकता के आधार पर इस प्लांट के लिए स्थान का चयन किया। इस परियोजना से न केवल स्थानीय उद्यमियों को प्रबंधन का अनुभव मिलेगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और किसानों के लिए नए अवसर पैदा करने में भी मदद मिलेगी।
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि भारत की प्रतिबद्धता केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर ठोस कार्यों के माध्यम से दिखती है। उन्होंने पिछले वर्षों में किए गए कार्यों जैसे खाद्यान्न आपूर्ति, सैन्य वर्दी दान और आपदा प्रबंधन प्रणालियों का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्ची मित्रता वही है जो आम जनजीवन में सकारात्मक बदलाव लाए। भविष्य की योजनाओं पर उन्होंने कहा कि सूरीनाम सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार भारत ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ और अन्य सहयोग जारी रखने के लिए तत्पर है।