औद्योगिक विकास की ओर मध्यप्रदेश की लंबी छलांग; फ्रांस के साथ हुए आठ महत्वपूर्ण निवेश प्रस्ताव

औद्योगिक विकास की ओर मध्यप्रदेश की लंबी छलांग; फ्रांस के साथ हुए आठ महत्वपूर्ण निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को भोपाल में आयोजित इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव के समापन पर फ्रांसीसी डेलीगेशन और राजदूत थियरी माथू से भेंट की। इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित करना और फ्रांस के साथ आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि मध्यप्रदेश की सरकार उद्यमियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए पूरी तरह तैयार है।

बैठक में कॉन्क्लेव के दौरान हुए विचार-विमर्श और निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। राज्य सरकार को विभिन्न फ्रांसीसी समूहों से 8 लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) प्राप्त हुए हैं, जो स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और तकनीक जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक शांति, समृद्ध पर्यटन और अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियों के साथ एक ऐसा वातावरण दे रही है जहां उद्योगों का विकास सुगम है।

अपने संबोधन में डॉ. यादव ने वैश्विक राजनीति और भारत की बदलती भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एक ‘नया भारत’ उभरा है, जो तकनीक और रक्षा के क्षेत्र में दुनिया के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने फ्रांस को भारत का पुराना और भरोसेमंद मित्र बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा और कौशल विकास में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। विशेष रूप से राफेल डील और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते ने वैश्विक स्तर पर नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।

मध्यप्रदेश की भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के अंतर्गत कृषि आधारित उद्योगों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में सनोफी कंपनी के साथ हुए अनुबंध को अत्यंत उपयोगी बताया। मुख्यमंत्री ने राज्य की कनेक्टिविटी और निवेश के लिए अनुकूल नीतियों को सरकार की सबसे बड़ी शक्ति बताया और कहा कि वे पारदर्शिता के साथ औद्योगिक विकास को गति देना चाहते हैं।

कॉन्क्लेव में फ्रांसीसी राजदूत के साथ आईएफसीसीआई (IFCCI) की महानिदेशक पायल एस. कंवर और करीब 150 से अधिक नीति निर्माता व उद्योगपति शामिल हुए। प्रमुख कंपनियों जैसे सफलेट, सियस्ट्रा और मेडिकेप्स यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने प्रदेश में निवेश के प्रति भारी उत्साह दिखाया। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी आश्वस्त किया कि राज्य की उद्योग-हितैषी नीतियां निवेश को धरातल पर उतारने में पूरी मदद करेंगी।

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