रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘फोर्सेस फर्स्ट कॉन्क्लेव’ के दौरान देश की सैन्य तैयारियों पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि बीते 12 वर्षों में भारत ने रक्षा के क्षेत्र में बाहरी निर्भरता को पीछे छोड़ते हुए स्वावलंबन की ओर ऐतिहासिक कदम बढ़ाए हैं। रक्षा मंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ और ‘सेना सर्वोपरि’ के मूल मंत्र को अपनाते हुए सैन्य बलों के आधुनिकीकरण, स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता को अपनी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखा है।
इस अवसर पर सैनिकों के योगदान की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमाओं पर मुस्तैद थल सेना, समुद्र के भीतर सुरक्षा में तैनात नौसेना और आसमान में देश की रक्षा करते वायुसेना के जवान हमारे राष्ट्रीय गौरव के वास्तविक प्रतीक हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जो भी राष्ट्र अपने जांबाज सैनिकों के प्रति सम्मान का भाव नहीं रखता, उसका भविष्य कभी भी सुरक्षित नहीं रह सकता।
अपने संबोधन में उन्होंने पूर्ववर्ती नीतियों और वर्तमान सरकार के दृष्टिकोण के अंतर को भी स्पष्ट किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद सबसे पहला काम रक्षा क्षेत्र से जुड़ी पुरानी और सीमित सोच को बदलना था। सरकार ने एक मजबूत संकल्प के साथ कदम आगे बढ़ाए ताकि भारत अपनी सुरक्षा तैयारियों को पुख्ता करने के साथ-साथ सैन्य साजो-सामान के आयात पर अपनी निर्भरता को न्यूनतम कर सके।
घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने देश के भीतर एक ऐसा मजबूत रक्षा औद्योगिक ढांचा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया है, जो न केवल हमारी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करे, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख रक्षा निर्यातक देश के रूप में भी स्थापित करे। उन्होंने इसे वर्तमान सरकार की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक बताया।
पूर्ववर्ती सरकारों के कामकाज के तरीके पर टिप्पणी करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा सरकार देश के नागरिकों के कौशल और भारत की आंतरिक क्षमताओं पर पूरा भरोसा करती है। इसके विपरीत, पहले के समय में देश की सामर्थ्य को लेकर इस तरह का दृढ़ विश्वास देखने को नहीं मिलता था। उन्होंने साफ किया कि भारत रक्षा उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर होने की काबिलियत रखता है और सरकार इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
सामरिक स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने सचेत किया कि यदि कोई भी देश हथियार, मिसाइल, गोला-बारूद, रडार, ड्रोन और नेवीगेशन प्रणालियों जैसे आवश्यक उपकरणों के लिए विदेशी ताकतों पर आश्रित रहता है, तो उसकी रणनीतिक और सैन्य स्वतंत्रता भी प्रभावित होती है। सरकार इसी व्यवस्था को समूल बदलने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
भावी योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों का कालखंड केवल सेना के आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह एक बड़े युगांतरकारी बदलाव का गवाह बना है। भारत अब रक्षा सामग्री का महज एक आयातक या उपभोक्ता देश नहीं रह गया है, बल्कि वह तेजी से एक बड़े उत्पादक और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभर रहा है।