नीट परीक्षा को लेकर उपजे विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंपते हुए स्पष्ट किया कि देश के युवाओं के अधिकार और राष्ट्रसेवा उनके लिए सबसे ऊपर हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए एक संदेश में उन्होंने कहा कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते रहे हैं और उनके लिए छात्रों के हित हमेशा सबसे पहले रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी सार्वजनिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वे विगत चार दशकों से अधिक समय से विद्यार्थियों, अध्यापकों और शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार के प्रयासों से जुड़े रहे हैं। उनके अनुसार, एक मजबूत, पारदर्शी और दूरदर्शी शिक्षा नीति ही किसी भी देश की प्रगति की मजबूत नींव होती है। उन्होंने हमेशा देश की युवा पीढ़ी की उम्मीदों, भावनाओं और उनकी वाजिब मांगों का आदर किया है।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) के संदर्भ में पूर्व मंत्री ने कहा कि गत 3 मई को आयोजित परीक्षा में धांधली की खबरें आने के बाद केंद्र सरकार ने त्वरित कदम उठाए। मामले की तहकीकात सीबीआई को सौंपने के साथ ही पुरानी परीक्षा को निरस्त कर नए सिरे से परीक्षा की तिथि तय की गई। इसके अलावा, भावी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए आगामी वर्ष से इस परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (सीबीटी) मोड में कराने का फैसला लिया गया। सरकार का मुख्य ध्येय 20 लाख से ज्यादा परीक्षार्थियों का भविष्य सुरक्षित करना था, जिसमें राज्यों, जिला प्रशासनों और अभिभावकों का भी सहयोग प्राप्त हुआ।
अपने वक्तव्य में धर्मेंद्र प्रधान ने जोर देकर कहा कि पूरे प्रकरण में उन्होंने पहले दिन से ही नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी अपनी जवाबदेही से पीछे नहीं हटे। उनका मुख्य उद्देश्य यही रहा कि परीक्षा माफिया की हरकतों के कारण किसी योग्य उम्मीदवार का नुकसान न हो। उन्होंने बताया कि 16 जुलाई को जारी हुए परिणाम संतोषजनक रहे, जिनमें कई आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्रों ने सफलता प्राप्त की। हालांकि, उन्होंने इस बात पर गहरा दुख जताया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा विद्यार्थियों को भ्रमित करने की कोशिश की गई।
जंतर-मंतर पर सीजेपी द्वारा किए गए प्रदर्शनों और बीते दस दिनों के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हालिया परिस्थितियों ने उन्हें काफी व्यथित किया है। यह किसी व्यक्ति विशेष के आत्मसम्मान का विषय नहीं, बल्कि देश के भावी नागरिकों के भविष्य से जुड़ा मामला है। वे नहीं चाहते कि राष्ट्रविरोधी तत्व इस संवेदनशील स्थिति का अनुचित लाभ उठाएं या छात्रों का भविष्य अदालती उलझनों में उलझकर रह जाए। इसी कारण उन्होंने अपना इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
अंत में, धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और अटूट विश्वास के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने अपने साथी मंत्रियों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग का धन्यवाद किया। पूर्व शिक्षा मंत्री ने दोहराया कि देश की सेवा ही उनके जीवन का मूल ध्येय है और वे आगे भी ओडिशा की जनता, युवाओं तथा देश की प्रगति के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।