17 जुलाई तक भारत में आया $20 अरब का विदेशी निवेश, एफसीएनआर जमा ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड

17 जुलाई तक भारत में आया $20 अरब का विदेशी निवेश, एफसीएनआर जमा ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की ताजा शोध रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष योजना के तहत 30 सितंबर तक देश में एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट 65 से 70 अरब डॉलर के स्तर को छू सकती है, जबकि कुल पूंजी प्रवाह 80-85 अरब डॉलर रहने का आकलन है। 17 जुलाई 2026 तक देश में कुल 20 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी आई, जिसमें एफसीएनआर (बी) जमा का हिस्सा अकेले 17.4 अरब डॉलर दर्ज किया गया।

एसबीआई के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष ने पुष्टि की कि महज 45 दिनों के भीतर एफसीएनआर (बी) जमा का आंकड़ा 2013 में जुटाए गए 26 अरब डॉलर के स्तर से आगे निकल चुका है। 17 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि 17.4 अरब डॉलर जमा हो चुके हैं। इस पूरे प्रवाह को गति देने में देश के सरकारी बैंकों ने सबसे अग्रणी भूमिका निभाई है।

रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि अगस्त और सितंबर 2026 में मैच्योर होने वाली पुरानी एफसीएनआर रकम का बड़ा हिस्सा नई योजना की ऊंची ब्याज दरों की वजह से दोबारा सिस्टम में रिन्यू हो जाएगा। इसके अलावा, टैक्स छूट देने वाले विदेशी क्षेत्रों से करीब 10 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि आने की पूरी उम्मीद है, जिससे कुल संचित कोष में और बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

हालांकि, बाजारों में इस बात को लेकर अब भी असमंजस है कि इतनी भारी पूंजी आमद के बावजूद विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (एफसीए) और रुपए का मूल्य उस अनुपात में मजबूत क्यों नहीं दिख रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस समय अपनी मजबूत अंतरराष्ट्रीय शाखाओं और ग्राहकों से संबंधों के आधार पर घरेलू व विदेशी दोनों मोर्चों पर रणनीतिक कदम उठा रहे हैं।

अंत में, रिपोर्ट में पश्चिम एशिया के मौजूदा तनाव के बीच रिजर्व बैंक के बाजार हस्तक्षेप पर ध्यान केंद्रित किया गया है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि रुपया जो पहले बाहरी आर्थिक झटकों को सोखने का काम करता था, उसकी वह क्षमता कुछ कमजोर हुई है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के संकट और भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए रुपए की अंतर्निहित शक्ति को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

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