कैस्पियन सागर के जलीय क्षेत्र में एक ईरानी कमर्शियल पोत पर यूक्रेन द्वारा किए गए हमले के बाद मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में नया कूटनीतिक तनाव उत्पन्न हो गया है। शनिवार तड़के 3 बजे हुए इस हमले में एक नाविक की जान चली गई। घटना के तुरंत बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से दूरभाष पर विस्तृत चर्चा की और इस कार्रवाई को वैश्विक सुरक्षा मानकों के विपरीत बताया।
ईरान के विदेश मंत्रालय की ओर से दिए गए विवरण के अनुसार, विदेश मंत्री अराघची ने इस सैन्य हमले को अत्यंत घातक करार दिया। उन्होंने कहा कि उनका देश अपनी सीमाओं और व्यापारिक हितों पर हुए किसी भी प्रहार का माकूल जवाब देने का पूर्ण अधिकार सुरक्षित रखता है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान का समर्थन करते हुए कहा कि यह हमला न केवल अंतरराष्ट्रीय विधि का उल्लंघन है, बल्कि रूस और ईरान के बीच संचालित समुद्री व्यापार मार्ग के लिए भी गंभीर चुनौती है।
दोनों नेताओं की बातचीत का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट में निर्मित सुरक्षा स्थिति पर केंद्रित रहा। वार्ता में अमेरिका द्वारा अपने आश्वासनों से पीछे हटने के कारण क्षेत्र में बढ़ी असुरक्षा पर चिंता व्यक्त की गई। दोनों देशों ने सहमति व्यक्त की कि जलडमरूमध्य में जारी तनाव को कम करने और समुद्री यातायात को सुरक्षित बनाने के लिए तत्काल कूटनीतिक प्रयासों को गति देने की आवश्यकता है।
ईरानी विदेश मंत्री ने यूक्रेनी नेतृत्व पर तीखे राजनीतिक हमले भी किए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से अराघची ने कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की इजरायली हितों के अनुरूप काम कर रहे हैं और यूरोप को अवांछित युद्ध में खींचने की कोशिश कर रहे हैं। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास और रूसी समकक्ष लावरोव के साथ हुए संवाद का संदर्भ देते हुए अराघची ने स्पष्ट किया कि तेहरान इस कार्रवाई का उचित समय पर जवाब देगा।
मामले में त्वरित प्रशासनिक कदम उठाते हुए ईरान ने शनिवार को तेहरान में पदस्थ यूक्रेन के चार्ज डी’अफेयर्स को विदेश मंत्रालय में तलब कर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और आधिकारिक विरोध पत्र सौंपा। ईरान ने यूएन सुरक्षा परिषद सहित अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से मांग की है कि इस घटना के जिम्मेदार पक्षों और उनके समर्थकों पर जवाबदेही तय की जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, इस घटना से क्षेत्र में नया कूटनीतिक मोड़ आ गया है, जिससे ईरान-रूस की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हो सकती है।