सावन के अंतिम सोमवार पर देशभर के शिव मंदिरों में उमड़ा जनसैलाब

सावन के अंतिम सोमवार पर देशभर के शिव मंदिरों में उमड़ा जनसैलाब

पवित्र सावन मास के अंतिम सोमवार के अवसर पर देश भर के प्रमुख शिवालयों और ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। सुबह तड़के से ही भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की। भारी भीड़ के मद्देनजर सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ धाम में भोर से ही दर्शनार्थियों की लंबी कतारें देखी गईं। संपूर्ण मंदिर परिसर को रुद्राक्ष और आकर्षक फूलों से सजाया गया है। व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार ने बताया कि सुबह पांच बजे तक ही 60 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर चुके थे। मंदिर क्षेत्र में सुगम दर्शन व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद हैं।

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भी विशेष अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। दर्शन करने पहुंचे एक भक्त ने बताया कि सावन के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर सुबह की भस्म आरती के दर्शन करना उनके लिए अत्यंत सौभाग्यपूर्ण रहा। उधर, उत्तर प्रदेश के एटा स्थित कैलाश मंदिर में भी जलाभिषेक हेतु शिवभक्तों का तांता लगा रहा।

गुजरात के अहमदाबाद स्थित सरदारनगर के शिव मंदिर में विशेष पूजा और भव्य रुद्राभिषेक का आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय श्रद्धालुओं ने अनुष्ठानों में भाग लिया। वहीं बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीब नाथ धाम में भी दर्शनार्थियों की भारी भीड़ जुटी। बक्सर जिले में जिला मजिस्ट्रेट साहिला और पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने रामरेखा घाट से लेकर बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर तक कांवड़िया मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया और मंदिर में पूजा-अर्चना की। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार जिले भर से आए लोग अपनी मनोकामनाओं के साथ कतारबद्ध होकर जलाभिषेक कर रहे हैं।

ओडिशा के पुरी में हजारों कांवड़ियों ने महाप्रभु श्री जगन्नाथ के दर्शन किए, जहां धार्मिक परंपरा के तहत कपाट खोलने की विशेष ‘द्वारा फीता नीति’ संपन्न की गई। धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाले सावन के इस अंतिम सोमवार को देश भर के शिवालय ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों, मंत्रोच्चार और अनुष्ठानों से गुंजायमान रहे।

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