केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को पश्चिम बंगाल में लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं का भूमि पूजन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण अब दुनिया से रक्षा उपकरण खरीदने तक सीमित रहने के बजाय वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीक व उत्पाद बेचने का होना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्वदेशी हथियार प्रणालियों की ताकत और उनकी अनिवार्यता स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुई थी। उन्होंने निर्माताओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकने के लिए तीन मूल मंत्र दिए—ऐसी गुणवत्ता जिस पर दुनिया भरोसा करे, ऐसी कीमत जिसे बाजार चुने, और ऐसी समयबद्ध आपूर्ति जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीदार बार-बार ऑर्डर दें।
शिलान्यास की गई परियोजनाओं में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) की तीन नई जहाज निर्माण इकाइयां शामिल हैं, जिनमें रायचक शिपयार्ड, टिम्बर पोंड हावड़ा और दामोदर कॉम्प्लेक्स सुविधाएं प्रमुख हैं। इसके साथ ही यंत्र इंडिया लिमिटेड की दो अत्याधुनिक धातुकर्म सुविधाओं—3,000 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक ओपन डाई फोर्जिंग प्रेस और रेडियल फोर्जिंग प्लांट—की आधारशिला रखी गई।
800 से अधिक पोतों के निर्माण का अनुभव रखने वाले जीआरएसई की कार्यकुशलता की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि यह संस्थान भारतीय नौसेना की जरूरतों को पूरा करने के साथ एक जर्मन फर्म के लिए 12 मालवाहक जहाजों का निर्माण भी कर रहा है। उन्होंने इसे ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के संकल्प का सटीक उदाहरण बताते हुए घरेलू व विदेशी दोनों बाजारों में आक्रामक बोली लगाने का आह्वान किया।
रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि आत्मनिर्भरता कोई औपचारिक नीति भर नहीं है, बल्कि यह युद्धक्षेत्र में वास्तविक ताकत बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में जहाज मरम्मत और ओवरहॉल का बड़ा केंद्र बनने से भारी विदेशी मुद्रा बचेगी और हजारों रोजगार सृजित होंगे। साथ ही ये परियोजनाएं बंगाल के औद्योगिक तंत्र को पुनर्जीवित कर एमएसएमई और सहायक उद्योगों के लिए विकास के नए रास्ते खोलेंगी।