केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘इनोप्रोम इंडिया 2026’ के दौरान रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और औद्योगिक सहयोग को तेज करने का आह्वान किया। इस पूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने दोनों पक्षों के उद्योगपतियों से अपील की कि वे वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर और दोतरफा निवेश को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए साझा प्रयास करें।
गोयल ने वर्तमान व्यापारिक परिदृश्य को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि मौजूदा समय में दोनों देशों का व्यापार लगभग 60 अरब डॉलर के स्तर पर है। इसे अगले चार वर्षों में 100 अरब डॉलर तक ले जाने के लिए 40 अरब डॉलर की वृद्धि दरकार होगी, जिसके लिए प्रतिवर्ष दोहरे अंकों की लगातार बढ़ोतरी आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए दोनों देशों के निजी क्षेत्रों और उद्योगों को आगे बढ़कर भागीदारी निभानी होगी।
व्यापार में संतुलन और विविधीकरण लाने के लिए गैर-ऊर्जा क्षेत्र को प्राथमिकता देने की बात कहते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, ट्रैक्टर, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स, इंजीनियरिंग और खाद्य उत्पादों के निर्यात में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई ऐसे उत्पाद हैं जिनका रूस बड़े पैमाने पर वैश्विक आयात करता है और भारत प्रमुख निर्यातक है, फिर भी रूस को होने वाला भारतीय निर्यात सीमित बना हुआ है। हालांकि, खाद्य क्षेत्र में सुधार दर्ज हुआ है; भारत से मांस उत्पादों का निर्यात 36 से बढ़कर 97 मिलियन डॉलर, मत्स्य व जलीय उत्पादों का 123 से बढ़कर 159 मिलियन डॉलर, सब्जियों का 38 से बढ़कर 54 मिलियन डॉलर और चाय-कॉफी-मसालों का निर्यात 13 प्रतिशत बढ़कर 116 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि मिलिंग उद्योग के उत्पादों का निर्यात दोगुना हुआ है।
निवेश मोर्चे पर उन्होंने जानकारी दी कि ‘भारत-रूस प्राथमिकता निवेश परियोजना तंत्र’ उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा, खनन, रेलवे और नई तकनीकों से जुड़ी 40 सक्रिय परियोजनाओं की निगरानी कर रहा है। इसके साथ ही, निवेशकों को कानूनी सुरक्षा और स्पष्टता देने के लिए दोनों देश एक नई द्विपक्षीय निवेश संधि को तेजी से अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसके अतिरिक्त, भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर भी बातचीत जारी है, जिससे विशेषकर एमएसएमई सेक्टर के लिए व्यापक अवसर खुलेंगे।
लेनदेन को सुगम बनाने के संदर्भ में वाणिज्य मंत्री ने राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्राओं में भुगतान प्रणाली को सुदृढ़ करने पर बल दिया। उनका मानना है कि वास्तविक धरातल पर व्यापार अक्सर शुल्कों के बजाय भुगतान संबंधी बाधाओं से प्रभावित होता है। कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे जैसी बुनियादी परियोजनाओं में पूंजी लगाने की आवश्यकता जताई। इसके साथ ही वीजा, मानक, प्रमाणन और लॉजिस्टिक्स जैसी व्यावहारिक प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने का आग्रह भी अधिकारियों से किया गया।
रूसी कंपनियों को भारत के विशाल बुनियादी ढांचे का लाभ उठाने का न्योता देते हुए उन्होंने कहा कि देश में मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों से मजबूत औद्योगिक आधार तैयार हुआ है, जहां सालाना लगभग 130 अरब डॉलर का निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहा है। उन्होंने रूसी विनिर्माताओं से केवल व्यापार करने के बजाय भारत के प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक गलियारों में उत्पादन स्थापित करने और कुशल कार्यबल का उपयोग करने की अपील की। अंत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सात दशकों के ऐतिहासिक उतार-चढ़ावों के बीच आपसी ‘भरोसा’ ही इस साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत रहा है, जो संबंधों को कूटनीतिक औपचारिकताओं से आगे बढ़ाकर वास्तविक उत्पादन और औद्योगिक विकास की दिशा में ले जाएगा।