नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में गुरुवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर नए बीज विधेयक पर गहन परामर्श किया। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित कानून को अंतिम रूप देने से पहले जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे किसान संगठनों के सुझावों और चिंताओं को समझना था। मंत्री ने आश्वस्त किया कि प्राप्त सभी उपयोगी सुझावों को कानून के अंतिम प्रारूप में अवश्य शामिल किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित सीड बिल किसानों के अधिकारों को किसी भी रूप में सीमित नहीं करेगा। कृषक अपने पारंपरिक बीजों के उपयोग, आपसी विनिमय और खुले बाजार में उनकी बिक्री के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेंगे। इन बीजों के लिए डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य नहीं होगा, बल्कि जो किसान अपनी किस्म पंजीकृत कराना चाहें, उनके लिए स्वैच्छिक विकल्प उपलब्ध रहेगा। इसके अतिरिक्त, घरेलू उपयोग, गांव में बांटने अथवा अनुबंध के तहत बीज उत्पादन पर भी अनिवार्य पंजीकरण का नियम लागू नहीं होगा।
वर्तमान विधिक ढांचे की खामियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1966 का बीज अधिनियम और वर्ष 1983 का नियंत्रण आदेश आधुनिक समय की चुनौतियों से निपटने में असमर्थ हैं। देश का करीब 70 फीसदी बीज तंत्र वर्तमान कानून की पहुंच से बाहर है और कमजोर दंड प्रावधानों के कारण नकली व घटिया बीजों पर लगाम नहीं लग पा रही है। नए कानून में अपराधों को तीन अलग-अलग स्तरों पर बांटकर प्रभावी जुर्माने और चेतावनी की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, ताकि जवाबदेही तय हो सके।
मसौदे पर पूर्व में नवंबर-दिसंबर 2025 के दौरान मांगे गए सार्वजनिक परामर्श में करीब 18 हजार सुझाव प्राप्त हुए थे। मंत्री ने कहा कि चूंकि किसान संगठन वास्तविक समस्याओं को भली-भांति समझते हैं, इसलिए अब उनके साथ प्रत्यक्ष वार्ता का क्रम शुरू किया गया है और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा। कानून को पारित करने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई जाएगी।
बैठक में भारतीय किसान संघ, बीकेयू के कई घटक, अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति और किसान महापंचायत समेत अनेक राज्यों के प्रतिनिधि शामिल रहे। मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार प्रत्येक नीति किसानों के साथ निरंतर संवाद और सहमति के आधार पर ही लागू करने की पक्षधर है। उन्होंने रेखांकित किया कि अन्य पक्षों से राय लेने के बावजूद किसान ही केंद्र में रहेंगे, ताकि देश को नकली बीजों से मुक्त कर एक सुदृढ़ गुणवत्ता तंत्र दिया जा सके।