संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के उद्देश्य से शुक्रवार को भारत की राजधानी पहुंचे। उनके आगमन पर केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने उनका औपचारिक स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि यूएन प्रमुख की मौजूदगी संवाद, बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति सदस्य राष्ट्रों की साझा प्रतिबद्धता को बल प्रदान करती है।
इस आगमन की आधिकारिक पुष्टि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के जरिए की। यूएन प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक के वक्तव्य के अनुसार, अपने इस दौरे पर महासचिव की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से औपचारिक भेंट होने की संभावना है। पदभार संभालने के बाद गुटेरेस का यह पांचवां भारत दौरा है, जबकि मौजूदा वर्ष 2026 में यह उनकी दूसरी यात्रा है; इससे पहले वह फरवरी में दिल्ली स्थित इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट का हिस्सा बने थे।
चार माह बाद समाप्त हो रहे अपने कार्यकाल के दृष्टिगत गुटेरेस के लिए यह शिखर सम्मेलन कूटनीतिक रूप से विशेष महत्व रखता है। यह उनके पास शीर्ष भारतीय नेतृत्व के साथ-साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बतौर महासचिव मुखातिब होने का संभवतः आखिरी मौका है। गौरतलब है कि दोनों ही राष्ट्राध्यक्ष इस महीने होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से दूर रहेंगे, लेकिन ब्रिक्स बैठक में भाग ले रहे हैं।
इसी कड़ी में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा भी शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे, जहां केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों की सुदृढ़ ऐतिहासिक व रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि भारत और दक्षिण अफ्रीका मिलकर विकासशील विश्व के सरोकारों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के क्रम में सेलाक का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन और युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो का भी राजधानी में स्वागत हुआ। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जहां सेलाक के साथ व्यापार, नवाचार और तकनीकी साझेदारी का विस्तार केंद्र में है, वहीं युगांडा के साथ द्विपक्षीय व बहुपक्षीय स्तर पर घनिष्ठ संबंध साझा किए जा रहे हैं। भारत के नेतृत्व में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में साझेदार देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होकर सामयिक वैश्विक संकटों और साझा सहयोग पर विचार-विमर्श करेंगे।