संसद भवन में सोमवार को रक्षा सलाहकार समिति की बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता रक्षामंत्री राजनाथ ने की, जिसमें BJP के 4 सांसदों सहित विपक्ष के 12 सांसद शामिल हुए। बैठक में विपक्षी सांसदों ने योजना को वापस लेने या इसकी इसमें बदलाव की मांग की। सांसदों ने कहा कि योजना के तहत भर्ती के लिए बड़ी संख्या में आवेदन की वजह बेरोजगारी है।
विपक्ष ने बेरोजगारी दूर करने को लेकर सरकार पर कदम न उठाने का आरोप लगाया। कमेटी मेंबर्स के सामने डिफेंस मिनिस्ट्री की ओर से योजना की विस्तृत जानकारी को लेकर प्रेजेंटेशन दिया गया। वहीं, मीटिंग के बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह एक अच्छी बैठक की थी।
बैठक में TMC के सुदीप बंद्योपाध्याय, सौगत रॉय शामिल हुए। वहीं, NCP की सुप्रिया सुले, कांग्रेस से रजनी पाटिल, शक्ति सिंह गोहिल और मनीष तिवारी, RJD से एडी सिंह और भाजपा से रंजनबेन भट्ट और राम भाई मोखरिया शामिल हुए। इनके अलावा आर्मी चीफ मनोज पांडे, नेवी चीफ एडमिरल आर हरि कुमार सहित तीनों सेनाओं के सीनियर अफसर भी मीटिंग में मौजूद थे।
प्रोफेसर सौगत रॉय, सुदीप बंद्योपाध्याय, एडी सिंह, सुप्रिया सुले, रजनी पाटिल और शक्ति सिंह सहित विपक्ष के 6 सांसदों ने राजनाथ सिंह को एक ज्ञापन सौंपा। हालांकि, कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी ने योजना के विरोध के बावजूद , ज्ञापन पर साइन नहीं किया। तिवारी ने मौखिक रूप से अग्निपथ योजना के विरोध किया। उन्होंने कहा कि वे आर्मी के मॉडर्नाइजेशन के पक्ष में हैं लेकिन अग्निपथ योजना लागू करने के खिलाफ हैं।
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, विपक्ष ने कहा कि सेना एक स्ट्रैटेजिक यूनिट है, जो कि देश की सुरक्षा और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। इस बात की क्या गारंटी है कि यूनिट में 4 साल तक काम करने के बाद वह देश की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
इस बात की पुष्टि के लिए विपक्ष ने जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे की हत्या का उदाहरण दिया, जिन्हें एक पूर्व सैनिक ने गोली मार दी थी। विपक्षी नेताओं ने कहा कि रूस और यूक्रेन सहित कई जगहों पर यह देखा गया है कि लंबे समय तक सेवा देने वाली सेना अधिक प्रभावी और शक्तिशाली होती है क्योंकि यह अच्छी ट्रेनिंग से गुजरती है।