मुख्यमंत्री के निर्देशों पर, शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और ड्रॉप आउट दर को शून्य करने पर विशेष ध्यान दिया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लक्ष्यों के अनुरूप, 2030 तक सकल नामांकन अनुपात (GER) को 100% करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्य निर्देश और पहल:
- विभागों में तालमेल: स्कूल शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग को बाल वाड़ियों को सक्रिय करने के लिए समन्वय स्थापित करने को कहा गया है।
- डिजिटल पहचान: राज्य के सभी बच्चों के लिए 12 अंकों का आधार-आधारित ‘अपार आईडी’ बनाना अनिवार्य है, जिसे 31 दिसंबर तक शत प्रतिशत पूरा करना होगा। यह आईडी डिजिलॉकर से जुड़ी रहेगी और इसी के माध्यम से छात्रवृत्ति, गणवेश और किताबें वितरित की जाएंगी।
- स्थानीय भाषा को प्रोत्साहन: बीजापुर जिले की सराहना की गई जहाँ ‘शिक्षादूत’ कार्यक्रम के तहत स्थानीय 10वीं-12वीं पास युवाओं की मदद से कक्षा 1-5 के बच्चों को उनकी बोली (गोंडी) में शिक्षा दी जा रही है, जिससे उपस्थिति बढ़ी है और ड्रॉप आउट कम हुआ है।
- शिक्षण सामग्री का उपयोग: कक्षाओं में दी गई शिक्षण सामग्री का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने और उन्हें अलमारियों में बंद न रखने का निर्देश दिया गया है।
- परीक्षा परिणाम सुधार: दसवीं और बारहवीं के परिणाम सुधारने के लिए जिला स्तर पर कलेक्टरों को योजना बनाने को कहा गया है। रायगढ़ के नवाचार (नियमित मंथली टेस्ट, एक्स्ट्रा क्लासेस) और जीपीएम जिले के हॉस्टल में चलाए गए अतिरिक्त कक्षाओं और टेस्ट की प्रशंसा की गई। दंतेवाड़ा में दसवीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में 9.32 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
- मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान: इस अभियान के तहत सभी स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) कर उनकी ग्रेडिंग की जाएगी।
- शिक्षक प्रोत्साहन और निगरानी: अच्छा काम करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। आधार-आधारित उपस्थिति की योजना बनाकर निगरानी करने और आवश्यक होने पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
- छात्र उपस्थिति: शाला विकास समितियों और पालकों को सक्रिय कर शहरी क्षेत्रों सहित सभी जगह छात्रों की शत प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।