नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में संसदीय परामर्शदात्री समिति की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य एजेंडा “सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में कमी लाना” था। इस दौरान राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा और श्री अजय टम्टा भी उपस्थित रहे।
बैठक में सड़क सुरक्षा के चार प्रमुख स्तंभों—इंजीनियरिंग, प्रवर्तन (Enforcement), शिक्षा और आपातकालीन देखभाल—पर आधारित एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। सचिव ने बताया कि मंत्रालय आईआईटी कानपुर के सहयोग से AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सक्षम तकनीक विकसित कर रहा है। नितिन गडकरी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि दूरसंचार विभाग ने वाहन-से-वाहन संचार के लिए 30 गीगाहर्ट्ज़ रेडियो फ्रीक्वेंसी आवंटित की है, जिससे दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे अपने जिलों में सड़क सुरक्षा समिति (MPRSC) की नियमित बैठकें सुनिश्चित करें।
बैठक के प्रमुख सुझाव और निर्णय:
- ब्लैक स्पॉट और भूस्खलन: दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) की तर्ज पर अब भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की भी पहचान की जाएगी।
- इमरजेंसी रिस्पांस: प्रत्येक जिले में कम से कम एक ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने और पीड़ितों के लिए मुआवजा बढ़ाने का सुझाव दिया गया।
- स्कूली शिक्षा: सड़क सुरक्षा को स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
- गुणवत्ता नियंत्रण: साइनबोर्ड और रिफ्लेक्टर की खराब गुणवत्ता पर नाराजगी जताई गई और इसे सुधारने के निर्देश दिए गए।
नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि अब सड़क की DPR (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करते समय ही सुरक्षा पहलुओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे क्षेत्रीय स्तर पर सांसदों के साथ समन्वय स्थापित करें।