केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आगामी रविवार, 10 मई को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में संभावित बाढ़ की स्थिति और भीषण गर्मी (हीटवेव) से निपटने के लिए की गई तैयारियों का बारीकी से आकलन करना है। गृह मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सरकार प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
हाल के वर्षों में गृह मंत्री के दिशा-निर्देशों के तहत भारत के आपदा प्रबंधन ढांचे में व्यापक सुधार किए गए हैं। इस प्रक्रिया में केंद्र और राज्य सरकारों की एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल को बेहतर बनाने और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को और अधिक शक्तिशाली बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का मुख्य लक्ष्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ‘शून्य जनहानि’ के लक्ष्य को प्राप्त करना है, ताकि किसी भी अनहोनी में किसी भी नागरिक की जान न जाए।
रविवार को होने वाली इस समीक्षा बैठक में अमित शाह केंद्र सरकार की विभिन्न इकाइयों की सक्रियता की जांच करेंगे। बैठक का मुख्य केंद्र प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) की प्रभावशीलता और राहत संसाधनों की समय पर तैनाती सुनिश्चित करना होगा। गृह मंत्री इस बात पर जोर देंगे कि आपदा के समय जान-माल का नुकसान न्यूनतम हो और इसके लिए सभी एजेंसियां एक एकीकृत तंत्र के रूप में कार्य करें।
इसके अतिरिक्त, बैठक में बाढ़ के दीर्घकालिक समाधानों पर भी चर्चा की जाएगी। इनमें बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सुरक्षा, नदियों का उचित प्रबंधन और मौसम विज्ञान के क्षेत्र में हुई वैज्ञानिक प्रगति का उपयोग कर सटीक पूर्वानुमान लगाने जैसे विषय शामिल हैं। शाह इन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे ताकि भविष्य में बाढ़ के खतरों को स्थायी रूप से कम किया जा सके।
जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से, गृह मंत्री पिछले वर्ष की समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन की भी रिपोर्ट लेंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी आपदा प्रबंधन गतिविधियां त्वरित और समन्वित तरीके से पूरी की जाएं, जिससे नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस और आपदा-रोधी भारत के निर्माण की प्रतिबद्धता को और मजबूती मिल सके।