मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 24,200 करोड़ रुपये के विकास प्रस्तावों को मंजूरी, इंदौर मेट्रो के लिए अतिरिक्त बजट स्वीकृत

मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 24,200 करोड़ रुपये के विकास प्रस्तावों को मंजूरी, इंदौर मेट्रो के लिए अतिरिक्त बजट स्वीकृत

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्य प्रदेश के बुनियादी ढांचे और जन-कल्याणकारी योजनाओं को गति देने के लिए कुल 24,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इस बड़े बजटीय आवंटन के तहत इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए अतिरिक्त वित्तीय व्यवस्था को शामिल करते हुए कुल 19,472 करोड़ 29 लाख रुपये का संशोधित बजट मंजूर किया गया है। इसके साथ ही, कैबिनेट ने वन्य-प्राणी संरक्षण, जनजातीय कल्याण, श्रमिक कल्याण और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए आगामी पांच वर्षों (2026-2031) हेतु कई महत्वपूर्ण योजनाओं को हरी झंडी दिखाई।

राज्य में विश्वस्तरीय सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं को सुलभ बनाने और परोपकारी संस्थाओं के निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से ‘मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति 2026’ लाने की तैयारी की जा रही है। इस नीति के विभिन्न पक्षों का गहन अध्ययन करने के लिए कैबिनेट ने एक 5 सदस्यीय मंत्रि-मंडल उप समिति का गठन किया है, जो अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से एक प्रायोगिक (पायलट) परियोजना को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत रीवा, देवास और गुना जिलों के चिह्नित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स मॉडल पर संचालित किया जाएगा।

इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के वित्तीय ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए कैबिनेट ने इसकी मूल लागत 7,500.80 करोड़ रुपये में 5,388.58 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़कर कुल संशोधित लागत 12,889.38 करोड़ रुपये तय की है। इसके अलावा, पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) घटक और आंतरिक ऋण के प्रभाव को मिलाकर 6,582.91 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वित्त पोषण को भी मंजूरी दी गई है। इस अतिरिक्त वित्तीय भार में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 1,696 करोड़ 74 लाख रुपये की अतिरिक्त इक्विटी, केंद्रीय करों के लिए 214 करोड़ 64 लाख रुपये का अधीनस्थ ऋण, और वित्तीय संस्थानों से 3,496 करोड़ 15 लाख रुपये का अतिरिक्त आंतरिक ऋण शामिल है।

वन्य-प्राणी संरक्षण और प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031) के दौरान 2,381 करोड़ 15 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें से 1,131 करोड़ 15 लाख रुपये ‘प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलीफेंट’ के तहत कूनो राष्ट्रीय उद्यान, गांधीसागर अभयारण्य और विभिन्न टाइगर रिजर्व में वन्य-जीव सुरक्षा, जल स्रोतों के विकास और हाथियों के प्रबंधन पर व्यय होंगे। वहीं, संजय, सतपुड़ा, पन्ना, वीरांगना दुर्गावती और रातापानी सहित अन्य संरक्षित क्षेत्रों के 94 गांवों के विस्थापन और ग्रामीणों को उचित मुआवजा देने के लिए 1,250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

सामाजिक समावेशन को ध्यान में रखते हुए जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित अशासकीय संस्थाओं के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि में 687 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से प्रदेश के 22 जिलों में कार्यरत 32 अनुदान प्राप्त संस्थाओं के जरिए जनजातीय विद्यार्थियों को आवासीय, शैक्षणिक और छात्रावास की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जिसमें जेंडर समानता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए सिल्क (रेशम) उत्पादन से जुड़ी विभिन्न योजनाओं हेतु वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 639 करोड़ 25 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे बुनकरों और ककून उत्पादकों की आय में वृद्धि होगी।

श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और औद्योगिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए श्रम विभाग के अंतर्गत आगामी पांच वर्षों के लिए 531 करोड़ 78 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें से श्रम आयुक्त कार्यालय के संचालन के लिए 57 करोड़ 48 लाख रुपये और श्रम कानूनों के क्रियान्वयन के लिए 289 करोड़ 89 लाख रुपये रखे गए हैं। साथ ही, स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन और ऑडिट व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन के लिए 492 करोड़ 45 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है, जो नगरीय और ग्रामीण निकायों के खातों की संपरीक्षा और पेंशन प्रकरणों का निपटारा करेगी।

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